परम पूज्य प्रज्ञाश्रमण सर्वोदयी राष्ट्र संत सारस्वताचार्य श्री १०८ देवनन्दि जी गुरुदेव की इस महामंत्र पर विशद चिंतनोपरांत यह सात्विक भवना रही है कि एक ऐसे तिर्थ का उदय हो जहॉं णमोकार मंत्र
परम पूज्य प्रज्ञाश्रमण सर्वोदयी राष्ट्र संत सारस्वताचार्य श्री १०८ देवनन्दि जी गुरुदेव की इस महामंत्र पर विशद चिंतनोपरांत यह सात्विक भवना रही है कि एक ऐसे तिर्थ का उदय हो जहॉं णमोकार मंत्र
परम पूज्य प्रज्ञाश्रमण सर्वोदयी राष्ट्र संत सारस्वताचार्य श्री १०८ देवनन्दि जी गुरुदेव की इस महामंत्र पर विशद चिंतनोपरांत यह सात्विक भवना रही है कि एक ऐसे तिर्थ का उदय हो जहॉं णमोकार मंत्र
" जो पिच्छी का पीछा करते, वे श्रावक कहलाते | जब तक पिच्छी का पीछा हैं , मोक्ष नहीं जा पाते ||
जिनने पिच्छी पकड़ी, उनको मोक्ष लक्ष्मी वरती | ऐसे त्यागी संतो का , पिच्छी खुद पीछा करती ||"